Saturday, December 13, 2025

मन के भाव

  आनंद और उत्सव 

घर आँगन में, आज खुशियाँ आई हैं,
हर  दिल में, उमंग की लहरें छाई है,
विवाह का आज, शुभ  दिन आया है,
आनंद का  उत्सव, घर में  छाया है। 

 अभिषेक के लिए

बचपन में जिसने,  मेहनत करनी सीखी,
सपने सच करने की, रीति जिसने सीखी,
वह अभि आज बना परिवार का मान है, 
मेहनत  से कमाया,  इसने बड़ा नाम है। 

नानाजी-नानीजी के लिए 

नानीजी से पाया, निशदिन प्यार अपार,
उनका स्नेह  बना,  जीवन का  आधार,
नानाजी ने मंत्र दिया, कर्म की पूजा करो,
कलाम जी ने कहा, सपने साकार करो।

 दादी जी के लिए 

अपनी दादीजी का,  सदा रहा तुम प्यारा,
उनकी आँखों का था, तुम एक राजदुलारा, 
मम्मी-पापा से प्यार मिला, फूलों जैसा प्यारा, 
उनके प्यार दुलार में, महका बचपन तुम्हारा। ।

संयुक्त परिवार के लिए

संयुक्त परिवार हमारा, एक सुन्दर संसार है, 
यहाँ  रिश्तों में बसता,  सब में स्नेह अपार है,
प्यार भरा जीवन यहां, सच्चे सुख का भान है,
हम सब को इस पर, बहुत बड़ा अभिमान है। 

दुल्हनिया प्रियांशी के लिए

नई दुल्हनियाँ कल जब, आँगन में आयेगी,
सुख - समृद्धि के घर में, वो दीप जलायेगी,
जीवन सफर में दोनों, सबको देंगे सम्मान,
घर में खिलेगा प्रेम का, सुन्दर एक विहान। 

 नव दम्पति को आशीर्वाद

बरसे सदा आशीष मेरा, हर दिन लाए बहार,
सफल रहे जीवन तुम्हारा, मिले  सुख अपार। 
प्यार से रहना दोनों, बहती रहे प्रेम की धारा,
फूलों सा महके सदा, जीवन संसार तुम्हारा।  




त्रिपदियाँ

बचपन का प्यार भी था गुलाबी 
खत का जबाब पाने को भेजते 
संग लिफाफा भी इक जबाबी। 

बच्चे पढ़ने के नाम  विदेश जाते 
नौकरी के संग घर भी बसा लेते 
वो जीत जाते, माँ-बाप हार जाते।

लड़का देखता लड़की का सौंदर्य 
लड़की देखती लड़के की कमाई 
इतिहास गवाह,जीता सदा सौंदर्य। 

लोकतंत्र आज बन गया बाँटतंत्र 
बिक गया मुफ्त  की रेवड़ियों में  
दुनिया का सबसे  बड़ा प्रजातंत्र।



Sunday, November 16, 2025

ऐसा प्यारा अपना घर हो

लिपा-पुता जहाँ आँगन हो, 
तुलसी का पावन बिरवा हो, 
बच्चो का शोर- शराबा हो,
पायल छम-छम बजती हो, 
ऐसा प्यारा अपना घर हो।  

हर कोना उपवन जैसा हो,
चिड़ियों का मधुर बसेरा हो,
पगुराती गायें-बछरियाँ हों,
माँओं की गोद में बच्चे हो, 
ऐसा प्यारा अपना घर हो। 

आस-पास जहाँ अपने हों, 
आँखों में सुख के सपने हों, 
जहाँ प्रेम की गंगा बहती हो,
खुशियों के नित उत्सव हो, 
ऐसा प्यारा अपना घर हो। 

साँझ ढले सब संग-संग हो, 
बिरवे पर दीपक जलता हो,
भजन-आरती प्रभु वंदन हो,
हर मन में प्रेम की गंगा हो, 
ऐसा प्यारा अपना घर हो।  






Monday, November 10, 2025

मैं खुशियों भरा जीवन जी रहा हूँ।

जीवन राह पर चलते-चलते 
मैं पगडंडी पर आ गया हूँ 
अब मेरे आस-पास 
कोई जंगल 
गीत नहीं गुनगुना रहा  
कोई पहाड़ हँस नहीं रहा 
कोई नदी 
अमृत नहीं छलका रही 
कोई फूल 
मुस्कुरा नहीं रहा।    

फिर भी मैं 
हँसता, मुस्कुराता 
प्यार के गीत गुनगुनाता  
पगडंडी पर बढ़ता जा रहा हूँ। 

शहदिली मुस्कान के संग 
उदासी का उपहास उड़ाता हुआ 
मैं खुशियों भरा जीवन जी रहा हूँ। 


Saturday, October 25, 2025

निर्लिप्तता का ही ज्ञान दे रहा हूँ।

मैंने अब जीवन के सिद्धांतों से
समझौता करना सिख लिया है,
अच्छे और बुरे के बीच में अब
संतुलन रखना  सीख लिया है। 

अब हवन करने से हाथ जलते हैं,
भलाई करनेपर ठोकर मिलती है, 
किसी को भी उधार देकर देखलो,
माँगने पर दुश्मनी ही मिलती है। 

रोज़ अपहरण की घटनाऐं होती है,
गुंडागर्दी  और छुरेबाज़ी  होती है,
अबलाओं का शील हरण होता है,
सुपारी लेकर हत्याएँ की जाती हैं।

ये सब अखबार में रोज़ पढ़ता हूँ,
चाय की चुस्की संग निगलता हूँ,
मन के आक्रोश को पी जाता हूँ,
मौन रह, जख्मों को सी जाता हूँ।

जुल्म के आगे सिर झुका रहा हूँ,
यही ज्ञान बच्चों को भी दे रहा हूँ, 
भलाई का जमाना अब नहीं रहा,
निर्लिप्तता का ही ज्ञान दे रहा हूँ। 

Wednesday, October 15, 2025

विश्व गुरु कहलायेगा

क्या रसखान सूर तुलसी 
का जमाना फिर आयेगा, 
क्या भय से पथराया जग 
फिर से प्रेम गीत गायेगा ?

क्या नफरत के समाज में 
फिर से भाईचारा आयेगा,
ढाई आखर प्रेम का बोल 
फिर से समाज में गूँजेगा। 

क्या मीरा का भक्ति-प्रेम 
तुलसी की चौपाई राजेगी,
हिंसा-घृणा की दीवार टूट 
जीवन की गरिमा गाजेगी। 

क्या सत्य अहिंसा का पथ
फिर से जीवन राह बनेगा,
मेरा प्यारा भारत फिर से
विश्व गुरु कहलायेगा। 🌼













Wednesday, September 24, 2025

बिना राग का गीत बन गया

स्वप्न संजोती हँसी तुम्हारी 
स्मृति दंश बनी जीवन का,
आज बरसने को आतुर है 
रुँधा बादल मेरे नयन का। 

तुम बिन लगती सांस अधूरी
जीवन तुम बिन सूना लगता, 
अश्रु बन बहे नयन की धारा
दर्द भरी  कवितायें लिखता।

मेरे जीवन का सावन बीता 
स्वाद सुखों के हुए  कषैले,
राहसफर में साथ जो छूटा 
ख्वाब रह गए मेरे अकेले। 

जीवन का सपना मुरझाया 
हर पथ अब वीरान हो गया, 
बिना हमसफ़र जीवन मेरा 
बिना राग का गीत बन गया।