Friday, April 16, 2010

आनन्द





आनन्द है आनन्द है
आनन्द में रहेंगे

दुःख में रहें, सुख में रहें
 प्रभु का गुणगान करेंगे 
आनद है आनन्द है
आनन्द में रहेंगे 

घर में रहें या बाहर रहें
सबसे हम प्रेम करेंगे 
आनन्द है आनन्द है
आनन्द में रहेंगे

माता-पिता, भाई- बहन
  सब का सम्मान करेंगे 
आनद है आनन्द है
आनन्द में रहेंगे

झूठ नहीं, सच बोलेंगे
तन मन से भला करेंगे 
आनन्द है आनन्द है
आनन्द में रहेंगे

कर्म अपना करते रहेंगे 
फल की चिंता न करेंगे 
आनन्द है आनन्द है
आनन्द में रहेंगे। 



गीता भवन
१६ अप्रेल , २०१०
(यह कविता "कुमकुम के छींटे" नामक पुस्तक में प्रकाशित  है )

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