Wednesday, October 16, 2019

प्रभु ! रास रचाने आ जाओ

काली घटा छाई हो
बादल गरज रहे हो
बरखा बरस रही हो
प्रभु ! गोवर्धन उठाने आ जाओ।

चांदनी रात हो
जमुना का घाट हो
किनारे कदम का पेड़ हो
प्रभ! चीर चुराने आ जाओ।

मंजिल दूर हो
पांव थक कर चूर हो
किसी का साथ न हो
प्रभु! बंशी बजाते आ जाओ।

आँखों में नींद हो
ख्वाबों में आप हो
मटकी भरा माखन हो
प्रभु! माखन खाने आ जाओ।

मौसमें बहार हो
कोयल कूक रही हो
मौर नाच रहे हो
प्रभु! रास रचाने आ जाओ।



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