Wednesday, September 1, 2010

प्रकृति के रंग






टेढ़ी -मेढ़ी  कुछ खीँच लकीरे,
कृष्णा ने एक चित्र बनाया |

चित्र    देख   मैंने    जब  पूछा,
   उसने मुझको   यो समझाया |

  लाल रंग    जहाँ    बिखरा था,    
उसने उसको     भोर बताया |

 काला   रंग जँहा  छितरा   था   
उसको  काजल कोर बताया  |

  हरा रंग    धरती का आँचल,    
   पेड़ो    को उसने दिखलाया |    

नीला      रंग जँहा फैला  था, 
उसको गंगा जल   बतलाया  |

गायों  को चरते दिखलाया, 
 चिड़ियों को उड़ते  दिखलाया  ।

टेढ़ी -मेढ़ी  कुछ खीँच लकीरे,
कृष्णा ने एक चित्र बनाया |


कोलकत्ता 
१ सितम्बर, २०१०


(यह कविता "कुमकुम के छींटे" नामक पुस्तक में प्रकाशित है )


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