Sunday, September 16, 2012

विसमता



पेट भरते ही पक्षी दाना
छोड़  कर उड़ जाते है
वो भविष्य की नहीं सोचते
केवल वर्तमान में जीते है। 

इंसान वर्तमान में नहीं
भविष्य में जीता है और
आने वाले कल की चिंता
सबसे पहले करता है।

इसी कारण पक्षियों में   
आज भी समानता है
और इन्सानों में अमीर
गरीब जैसी विषमता है। 

मानव को प्रकृती ने
खुले हाथो से दिया है 
सबके लिए सामान
रूप से दिया है। 

काश ! हम सब मिलझुल
कर दुनिया में रह पाते
दुनिया से इस विषमता
को मिटा पाते |

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