Sunday, December 16, 2012

जीवन हँसता है


                              


कंही पर बड़े -बड़े भंडारे हो रहे है  
       कँही पर बच्चे भूखे सो रहे  है      
कोई फाइव स्टार में पार्टी दे रहा है    
कोई कचरे के ढेर को बिन रहा है  
                  जीवन फिर भी हँसता है।      

   किसी का घर रोशनी से चमक रहा है           
 किसी का घर आग से जल रहा है   
किसी के यंहा गीत गाये जा रहे है  
किसी के यंहा शोक मनाया जा रहा है       
             जीवन फिर भी हँसता है।  

कोई हवाई जहाज में सफ़र कर रहा है     
     कोई नंगे पांवों चला जा रहा है
कोई वातानुकूल कमरे में सो रहा है
   कोई फुटपाथ पर रात बिता रहा है
                जीवन फिर भी हँसता  है।

  कंही विजयश्री का जस्न हो रहा है
   कंही हार का विशलेषण हो रहा है
कही बर्लिन को एक किया जा रहा  है
 कंही कोसोवो को अलग किया जा रहां है       
                  जीवन फिर भी हँसता है।

       अगर जीवन का आनंद लेना है
          तो हमें  हँसते हुए ही जीना है
       हमें हँसी से मुँह नहीं मोड़ना है
        खुशियाँ से नाता नहीं तोडना है 
             जीवन तो फिर भी हँसता है।

(कहते है कि हँसना भी ध्यान है,हँसते समय मन विचार शून्य हो जाता है और विचार शुन्यता में ध्यान घटित होता है , जिससे ब्रह्मानंद  का सुख मिलता है )

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