Monday, January 23, 2017

जीवन बे-राग री

कहने को जीवन
खाली मन-प्राण
प्यार के आभाव में
फीका सब गान
साज टूटा, स्वर रूठा,जीवन बे-राग री।

तन्हाई में रहना
जुदाई को सहना
घुट-घुट कर जीना
टूट-टूट बिखरना 
उदासी छाई,आँखे भर आई,मिटा अनुराग री।

भूल गए  हम तो
मिलन की बातें
याद भला कहाँ
वो सुनहरी रातें
याद दिलाई, प्रीत लगाईं, बजा मृदु राग री।

झोली भर लाई
नेह भरी बातें
होंठ फिर हँसे
सुन प्रीत की बातें
तुमने जगाई, फिर लगाई, प्रेम आग री।


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