Saturday, August 8, 2026

रसराज

नन्द-यशोदा के -- सलौने गोपाल 
वासुदेव देवकी के -- बिछड़े वत्स
गोप-ग्वालों के -- नटखट नन्दलाल 
सांदीपनि के -- सर्वगुण सम्पन शिष्य 
सुदामा के -- परमप्रिय सहपाठी 
उद्धव के -- परमप्रिय प्रिय मित्र 
अर्जुन के -- प्रिय सखा 
द्रोपदी के -- प्रिय सखी 
गोपियों के -- प्रेम के अवतार 
राधा के -- प्राणों के आधार 
कंस के -- महाकाल 
कुब्जा के -- प्रेम की वरमाल 
अनेको रस थे कृष्ण मे, 
इसीलिए रसराज कहलाये।