Friday, March 13, 2015

नहीं मानता हिया





आज भी याद आती है
घूँघट की आड़ में
तुम्हारा मुस्कराना
तीज पर मेहंदी लगे
हाथों को दिखाना 

आज भी याद आती है   
गुदगुदाती रातों में 
शरारत भरी मुस्कराहटें 
पायल वाले पांवों की
खनकती आहटें 

आज भी याद आती है
चंचल चितवन और
शोखभरी अदाएं
मखमली पलकें और
बिखरी-बिखरी जुल्फें 

दिन और महीने बीत गए
लेकिन नहीं मानता हिया
आज भी पुकारता है
प्रिया ! प्रिया !प्रिया! 







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