Monday, April 17, 2017

गाँव की गलियों में बचपन

देश के महानगर में 
रह कर भी मुझे
गाँव की याद आती है 

आलिशान कोठियों में 
रह कर भी
मुझे गाँव वाले घर की
याद आती है। 

हवाई जहाजों में सफर
करते  हुए भी 
मुझे  बैल गाड़ी की
याद आती है।  

शितताप नियंत्रित 
घरों में रहते हुए भी मुझे
बरगद की ठण्डी छाँव 
याद आती है। 

पांच सितारा होटलों में 
खाना खाते हुए भी मुझे 
माँ के हाथ की रोटी की 
याद आती है। 

कर्ण-प्रिय संगीत  
सुनते हुए भी मुझे 
अलगोजे पर मूमल की
याद आती है।   

सुखी जीवन
जीते हुए भी मुझे
गाँव की गलियों में बिताए
बचपन की याद आती है।






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