Sunday, December 14, 2008

अमेरिका में मैंने देखा

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  एकाकी यहाँ का जीवन देखा,

 माँ-बाप सेअलग बेटों को देखा।
  दुःख-सुख में कोई साथ ना दे,
  ऐसा जीवन यहाँ का देखा।

गद्दो पर बैठे कुतो को देखा,
गोदी में बिल्लियों को देखा।

लेकिन ममता को गोद खेलते,
  मैंने  यहाँ  कहीं नही देखा।

लम्बी - चोड़ी   सड़कें देखी,
रंग  -  बिरंगी   कारें   देखी।
गले  मिल कर प्रेम से पूछे,
ऐसा  मैंने   यहाँ नही देखा।

क्लबों में नाचते-गाते देखा,
दौर शराब का चलते देखा।
भजन - कीर्तन करते कोई,
मैंने  यहाँ कहीं नही देखा।

अमेरिका,लन्दन,पेरिस देखा,
घूम - घूम  दुनिया को देखा।
ऐसा- वैसा   सब कुछ   देखा,
पर भारत जैसा देश न देखा।


सैन डिएगो (अमेरिका )
१३ दिसम्बर, 2008

1 comment:

  1. rashmi
    its simply fantastic.kaash mein bhi itna bhariya likh paati! aap humme sada hi prerna dete rahenge

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