Wednesday, June 26, 2013

बूढ़ापो (राजस्थानी)


म्हारी पींडियां में
चमके बीजळियां
पांसळियां मेळे
चबका

बूकियां में चाले
बाईंटां
डील की चटके 
सगळी हाडक्या

सगळै सरीर में
 चालै सिरणा 
सांसा चाळै
धोंकणी ज्यूं

अंख्यारी सगळी
चली गई जौत
कान हुग्या सफा 
साव बेरा

सळा भरगी
डीळरी चामड़ी
माथै रा केस
हुग्या धोळा  

बुढापो लागे
 जाणै कोई खुरदरा
कागज़ माथै घसीटती
कलम चालै

अब औ गुमान
करणो बिरथा के
 म्हारी जड़ा जमीन
  में उंडी लागै।

































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