Thursday, March 13, 2014

रिश्ते यूँ ही बन जाते है

राहे  सफर में 
रिश्ते यूँ ही बन जाते है
अनजाने अपने बन जाते है।

फ्रांसिस*जानती हो तुम
जग की अनूठी 
रीत है यह।  

राह चलते-चलते
किसी मोड़ पर मुड़ जाना 
किसी का मिल जाना।

मिल कर उसे 
अपना बना लेना 
अनकहे मन को पढ़ लेना। 

राहे सफर में रिश्ते 
यूँ ही बन जाते है 
अनजाने अपने बन जाते है।

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पंडित नेहरु ने 
तुम्हारी दादी को दिया था 
एक अनुपम उपहार#

दादी ने वर्षो तक 
संजोकर रखा उस धरोहर को 
फिर तुम्हे दिया उपहार। 

दादी की दी हुयी 
उसी अमूल्य धरोहर को 
तुमने दिया मुझे उपहार। 

तुम्हारी दी हुयी वही अमूल्य 
धरोहर अब मेरे पास सुरक्षित है
जिसे मै जीवन पर्यन्त 
सहज कर रखूंगी। 

घर में आया हर मेहमान
और आने वाली पीढ़ी 
तुम्हारे इस उपहार 
पर गर्व करेगी। 

फ्रांसिस 
जब-जब तुम्हारी याद आयेगी 
मै उसे प्यार से गले लगाउंगी। 

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* फ्रांसिस (अमेरिका) जो सुशीला की मुँहबोली बहन है। 
# हाथी दाँत की बनी हुयी एक बहुत सुन्दर गले की माला। 

5 comments:

  1. आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

    कल 16/03/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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    1. स्वागत यशवंत जी। होली की ढेर सारी शुभ कामनाये आपको और आपके परिवार को।

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  2. रिश्ते यूँ ही बन जाते है और
    अनजाने अपने बन जाते है।
    सच है जाने कब अपने अनजाने और अनजाने अपने हो जाते है :) होली की हार्दिक बधाई

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  3. This comment has been removed by the author.

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  4. आपका स्वागत सुनीता जी। होली की आप और आपके परिवार को शुभ कामनाएं।

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