Tuesday, May 5, 2015

शर्मशार हो रही है मानवता

अफगानिस्तान  के
सुदूर पहाड़ी इलाको में
अमरीकी द्रोण बरपा रहें हैं कहर

आकाश की तरफ देखते हुए
अपने खण्डर बने घर में
आँचल में छिपाए बच्चे की माँ
सोचती है काश भगवान ही
उसकी कोई मदद कर देता

पर यहाँ तो आकाश से ही
आग बरस रही है
चारों ओर सुनाई दे रहा है
आहतो का क्रन्दन
बिखरे पड़े है क्षत- वीक्षत
शरीरों के लोथड़े

कोई नहीं बचा है बाकी
जलते घरों और
सड़ती लाशों के बीच
शर्मशार हो रही है मानवता।







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