Thursday, September 10, 2015

आज भी याद आती है

मेरी लिखी कविताओं को, सबसे पहले तुम पढ़ती 
तुम्हारी हौंसला अफजाई, आज भी याद आती है।

 मेरे मन  में आज भी,  तुम्हारा प्रतिबिम्ब बसता है
   तुम्हारी पायल की छमछम,आज भी याद आती है।

आसमान के तारों में आज भी तुम्हें ढूंढता हूँ
चांदनी रातों में आज भी तुम्हारी याद आती है।

 तुम्हारा चाँदी सा रूप और चन्दन महकती देह 
  झील सी गहरी आँखों की,आज भी याद आती है।

 जिंदगी के राहे-सफर में, मैं आज तन्हा रह गया 
 तुम्हारी प्यारी मुस्कराहट,आज भी याद आती है।

तुम्हारी शोख़ आँखों के इशारे, मेरे दिल में बसे हैं
  तुम्हारी चूड़ियों की खनक,आज भी याद आती है।




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