Wednesday, September 2, 2009

कोल्हु का बैल


मेरे गांव में
कालू कुम्हार के
यहाँ एक बैल है 

बैल सुबह से
 शाम तक कोल्हू
  चलाता रहता है

और वह तब तक
चलाता रहेगा
जब तक वो
जिन्दा रहेगा

शहर में
इस बैल का
प्रतिनिधित्व
  मैं कर रहा  हूँ

सुबह से शाम तक
कोल्हू का बैल
बना घूमता
 रहता हूँ

और
  तब तक
   घूमता रहूँगा
       जब तक ......  .I




कोलकत्ता
२ सितम्बर, 

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