Thursday, September 10, 2009

बर्ड फ्लू



मुर्गी बोली
सुनो प्रिये
बर्ड फ्लू
आ गया है,
इंसान अब
हमें नही
खायेगा ।

अब हम
थोड़े नहीं
बहुत साल
तक जियेंगे।

मुर्गा बोला
तुम भूल रही हो
तुम जानवरों  के नही
इन्सान के पल्ले
पड़ी हो  ।

अरे  !
इन्सान तो
अपनों को भी
नही छोड़ते
तुमको
क्या छोडेंगे।

पहले तो
दस बीस को
मारते थे,

अब तो
हजारों को
एक साथ
मारेंगे।



कोलकत्ता
९ सितम्बर, २००९

(यह कविता "कुमकुम के छींटे" नामक पुस्तक में प्रकाशित है )

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