Tuesday, November 1, 2011

कसाब को बिरयानी

हर घटना
एक समय बाद
इतिहास की घटना
बन जाती है। 

युद्ध चाहे पानीपत का हो
या हल्दीघाटी का
आतंकी हमला मुंबई का हो
या पार्लियामेंट का
सभी घटनाएं  इतिहास के
पन्नों में दर्ज हो जाती है। 
  
आने  वाली पीढियाँ
इतिहासिक घटनाओं से
जब रूबरू होती है तब  
महात्मा गाँधी,भगत सिंह और
सुभाष चन्द्र बोस जैसे  प्रसंगों को
पढ़ कर गर्व करती है। 

लेकिन आज जब देश के
इतिहास में पढ़ती है कि
मुंबई आतंकी हमले के दोषी
कसाब को फाँसी की जगह
सरकार बिरयानी खिलाती रही

या पार्लियामेंट पर
आतंकी हमले के दोषी
अफजल गुरु को सरकार
दस वर्ष तक सजा देने में
नाकाम रही

तो उसका मन
इतिहास का सर्जन
करने वालो के प्रति
नफ़रत से भर जाता है।

इस नापाक साजिश पर
उसका दिल देश के इन कथित
नेताओं को चुल्लू भर पानी में
डूब मरने के लिए कहता है  |


(यह कविता  "कुमकुम के छींटे" नामक पुस्तक में प्रकाशित है )





कोलकता
३१ अक्टुम्बर २०११

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