Friday, May 24, 2013

प्रभु अगर ऐसा हो जाता



प्रभु अगर ऐसा  हो जाता
मै  छोटा पक्षी बन जाता
आसमान में ऊँचे उड़ कर
कलाबाजियां मै भी खाता।


पेड़ो पर मीठे फल खाता
झरनों का मै पानी पीता
स्कूल से हो जाती छुट्टी
होमवर्क नहीं करना पड़ता।


खेतो-खलिहानों में जाता 
नदी-नालो के ऊपर उड़ता
उड़ कर देश-प्रदेश देखता
नानी के घर भी उड़ जाता।


उड़ने पर कोई रोक न होती
आसमान मेरा घर होता
जब तक मर्जी उड़ता रहता
शाम ढले घर पर आ जाता।


मीठी वाणी बोल बोल कर
सबके मन को मै मोह लेता
बच्चो को मै दोस्त बना कर
सब को मीठे फल खिलाता।
















2 comments:

  1. Mastt poem hai Dadaji!!
    KK

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  2. तुम्हे अच्छी लगी,

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