Saturday, October 31, 2015

तुम्हारी धरोहर

सारी दुनियाँ
जब सो जाती है
मैं तब सपनों की गोद में
खो जाता हूँ।

तुम्हारी यादों की राहों में
पल-पल गुजरती रातों में
जोड़ता  रहता हूँ
यादों की लड़ियों को।

मैं जानता हूँ
तुम मुझे अब नहीं मिलोगी
लेकिन तुम्हारी यादें
सदा मेरे साथ रहेगी।

बचपन में तुम्हारा
दुल्हन बन गांव आना
मेरा कॉलेज में पढ़ कर
छुट्टियों में घर आना।

लड़ना-झगड़ना
प्यार मोहब्बत
बच्चों का होना
बहुओं का आना
पोते-पोतियों से
आँगन खिलखिलाना
कितना कुछ जीया हमने
इस जीवन में साथ-साथ।

सोच-सोच कर
खो जाता हूँ तुम्हारी यादों में
कईं छोड़ जोड़-जोड़ कर
ताजा करता हूँ
तुम्हारी यादों को
लौट-लौट कर आती है
तुम्हारी अनगिनत यादें।

ये यादें
धरोहर है तुम्हारी
और जीवन की नाव को
खेने की पूंजी है मेरी।









5 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 01 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    1. यशोदा जी आभार आपका।

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  2. सुन्दर अभिव्यक्ति

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  3. This comment has been removed by a blog administrator.

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