Friday, April 8, 2016

माँ का आशीर्वाद

आज से ठीक चार महीने पहले
घर में खुशियों का माहौल था
किसी का भी पाँव जमीं पर
नहीं टिक रहा था

मम्मी-पापा की शादी की
गोल्डन जुबली मनाई थी
सबने साथ मिल कर
ढेरों खुशियाँ बाँटी थी

लेकिन आज लगता है जैसे
जीवन में सब कुछ थम गया है
जीवन की राह में एक
पूर्ण विराम लग गया है

अचानक मम्मी हम सब को 
अकेले छोड़ कर चली गई
अपनी ईह लीला समाप्त कर
ईश्वर में विलीन हो गई

अब तो लगता है बिना मम्मी
के घर जैसे वीरान हो गया है
खुशियों से भरे जीवन में
वृजपात हो गया है

किससे जाकर कहूँ कि मम्मी
तुम्हारी बहुत याद आती है
हर पल तुम्हारी यादें
आँखों से अश्रु बहाती है।

लेकिन लगता है
मम्मी हमारे साथ ही है
वो हमारे जीवन का
पथ-प्रदर्शन कर रही है

जब तक मम्मी का
आशीर्वाद हमारे साथ है
जीवन खुशियों से भरा रहेगा
ऐसा हमरा विश्वाश है।


फरीदाबाद
२० सितम्बर,२०१४

लेखक - मनीष कांकाणी

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