Thursday, May 19, 2016

अब तुम्हारी याद में

एक तुम्हारे प्यार बिना, नीरस फीका यह जीवन
पीली पड़ गई खुशियाँ मेरी,अब तुम्हारी याद में।

 दुःख मेरा क्या बतलाऊँ,दिल रोता है रातों में  
खोया-खोया मन रहता है,अब तुम्हारी याद में।

गर्मी हो या सर्दी हो,क्या बसंत और क्या सावन
हर मौसम लगता पतझड़, अब तुम्हारी याद में।

खुशियां निकल गई जीवन से, तन्हाई में जीना है      
 आँखों से अश्रु जल बहता, अब तुम्हारी याद में।     

मंजिलें अब जुदा हो गई, अंजानी अब राहें हैं
मन रहता है सूना-सूना, अब तुम्हारी याद में।



जब से तुम बिछुड़ी मुझसे, नींद खो गई रातों में        
दिल तड़फता रहता मेरा,अब तुम्हारी याद में।   





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