Saturday, November 23, 2013

मर्यादा पुरुषोत्तम राम



हे मर्यादा पुरुषोत्तम राम
सीता से यही तो अपराध
हुवा कि उसने आपसे
स्वर्ण मृग माँगा।

वो भी इसलिए कि राम
की पर्णकुटी सुन्दर लगे
राम स्वर्ण मृगचर्म पर
बैठ सके ।

राज्य के सुखो को त्याग
सीता आपके साथ वन गयी
क्या इस अपराध के लिए
यह त्याग कम था ?
ने 
 सीता की
अग्नि परिक्षा ली
क्या यह स्त्रीत्व का
अपमान नहीं था ?

एक रजक के कहने से
आपने आश्वप्रसवा सीता
को निर्वासन दे डाला
क्या यही पति धर्म था ?

आपकी हृदयहीनता से दुःखी
सीता धरती में समा गयी
क्या यह नारी जाति का
अपमान नहीं था ?

राम!इतिहास के पन्नो में भले ही
आप "मर्यादा पुरषोत्तम" बने रहे
लेकिन सीता के साथ आप
न्याय कभी भी नहीं कर सके।








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