Saturday, July 2, 2011

देर कितनी लगती है.






मयखाने में जाकर जाम गले लगाये,
पैर लड़खड़ाने में देर कितनी लगती है ?

विश्वास के आँगन में शक के पांव पड़ जाए 
चूड़िया बिखरने में देर कितनी लगती  है ?

जीवन के चिराग पर गरूर करना
हवा का झोंका आने में देर कितनी लगती है ?

बाली उम्र की  थोड़ी सी नादानी,
पाँव फिसलने में देर कितनी लगती है ?

कार्य के प्रति इच्छा और समर्पण
सफलता मिलने  में देर कितनी लगती है ?

समुन्दर की चाहत पर बूंद को
नदी बनने में देर कितनी लगती है ?

ध्रुव और प्रहलाद जैसी भक्ति
प्रभु को आने में देर कितनी लगाती है ?



कोलकत्ता 
२ जुलाई, २०११
(यह कविता  "कुमकुम के छींटे" नामक पुस्तक में प्रकाशित है )

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