Monday, November 3, 2014

आज मुझे तुम्हारी बहुत याद आई है



मेरे प्यार की गलियाँ तुम बिन सुनी हैं
मेरी विरह की पीड़ा अब हो रही दूनी है
मेरे मधुबन के पाहुन तुम कहाँ चले गए
तुम्हें न देख दिल की कलियाँ मुरझाई है
आज मुझे तुम्हारी बहुत याद आई है।

प्यार का अक्षय सरोवर आज मेरा सुख गया
शेष है जीवन मगर पग ये बोझिल हो गया
मेरी हर सांस में अब भी हो तुम बसी हुयी
नयनों की आशा अब भी करती पहुनाई है
आज मुझे तुम्हारी बहुत याद आई है।

रात भर आज बिजलियाँ चमकती रही है
सावन की बदली रात भर उमड़ती रही है
रिमझिम बारिश तुम्हारी याद दिलाती रही
मेरे दिल में प्रीत तुम्हारी आज मुस्काई है
आज मुझे तुम्हारी बहुत याद आई है।






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