Sunday, November 9, 2014

हे मृत्यु जननी!

मृत्यु उस दिन
एक ममतामयी माँ
की तरह आई थी

उसने बड़े प्यार से
तुम्हे अपने अंक
लगाया था

स्नेह के साथ मुस्कराते
हुए तुम्हारे सिर को
सहलाया था

धीरे-धीरे थपकी देकर
तुम्हे सदा के लिए
गहरी नींद
सुला दिया था

हम कुछ समझ पाते
इससे पहले ही तुम तो
मृत्यु जननी की अंगुली पकड़
संग चली गई थी

हे मृत्यु जननी!
स्वागत तुम्हारा
जब भी किसी का
गमन दिन आए
तुम इसी तरह से आना

प्यार की थपकी देकर
अपने अंक लगाना और
अंगुली पकड़ संग ले जाना।




2 comments:

  1. खुदा ने हर एक के लिए ये सजा बनाई है
    जिन्दगी जी है तो मृत्यु से गुजरना पड़ेगा.

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  2. धन्यवाद आपका। जीवन है तो मृत्यु है, यह तो प्रकृति का अटल नियम है।

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