Saturday, December 13, 2014

गर्म कपड़े

जाड़े ने दी अपनी पहली दस्तक
बदलते मौसम में निकले कपड़े
तुम्हारी देह गंध बसी मिली मुझे
साथ-साथ रखे तुमने  जो कपड़े

तुम्हारी यादें दिल में मचल गई
जब बाहर निकले सर्दी के कपड़े
वो चुहल बाजियाँ और शरारते
जिनसे महक रहे थे सारे  कपड़े

याद आई तुम्हारी गर्म साँसों की
जैसे ही निकाले मैंने गर्म कपड़े
भूलाना चाहूँ तो भी कैसे भुलाऊँ
प्यार का अहसास दिलाते कपड़े

मौसम बदलते ही तुम कहा करती
सर्दी आ गयी पहनलो गर्म कपड़े
काश तुम आज भी आकर कहती
सर्दी लग जाएगी पहनलो  कपड़े।


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