Thursday, July 23, 2015

अब कहूँ तो भी क्या ?

जीवन के सफर में, हम दोनों साथ-साथ चले                                       
तुम चली गई साथ छोड़, कहूँ तो भी क्या ?             

अब तुम कभी नहीं आओगी, मेरे साथ हँसने
     मैं हँस कर जमाने को दिखाऊँ, तो भी क्या ?


ढलती उम्र में बेसहारा कर, चली गई तुम                                         
बिखर गए सारे अरमान, कहूँ तो भी क्या ?

दर्द के सुने महल में,मुझे निवासी कर गई 
  गम दे कर चली गई, अब कहूँ तो भी क्या ?

मैं सदा तुम्हारे लौटने की, मंगत मांगता रहा
तुम नहीं आई लौट कर,अब कहूँ तो भी क्या ?



भरी बहारों में, मेरा गुलसन वीरान हो गया  
            आँखों से बरसता है सावन, कहूँ तो भी क्या ?            






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