Wednesday, January 20, 2016

वो नारी थी

मृत पति संग
चिता पर जलाई गई
पांच पतियों समुख
निर्वस्त्र की गई
श्राप देकर पाषाण बनाई गई
वो नारी थी।

अग्नि परीक्षा ली गई
तलाक के तीन शब्द बोल
परित्यक्ता बनाई गई
बोटी-बोटी काट
तंदूर में जलाई गई
वो नारी थी।

पाषाण शीला खण्डों पर
नग्न देह उकेरी गई
जानवरों की भांति
नीलाम की गई
जन्म से पहले
कोख में मारी गई
वो नारी थी।

जलती लकड़ी से दागी गई
मिट्टी के तेल से जलाई गई
डायन कह कर पुकारी गई
वो नारी थी।

उसने प्रतिकार नहीं किया
जुल्मों को सह लिया
आज की नारी जुल्म नहीं सहेगी
वो प्रतिकार करेगी
वो अपनी जिंदगी जिएगी।











2 comments:

  1. आपकी लिखी रचना, "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 22 जनवरी 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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