Thursday, July 31, 2014

तुम्हारी मुस्कराहट को जड़ दिया है फ्रेम में

अब जीवन में कौन पूछेगा दुःख - सुख को
कौन पास बैठ कर सुनेगा मन की बातो को
अब तो साथ बिताये लम्हों को याद करना है
और उनकी टिस को जीवन भर झेलना है।


अब न तो कोई ख़ुशी बची है न कोई ख्वाइस
न सुखो को कभी आना है न दुखो को जाना है
अब तो  गमो के साथ ही रिश्ता निभाना है
उलझी साँसों को आँसुओं का साथ निभाना है।


जिंदगी में सुख तो अब सपना बन गया है
शब्द भी मुँह से नहीं आँखों से ही झरते हैं
मन की पीड़ा दिन-रात अश्रुमेघ बरसाती है
जीवन अब अंगारो में बची राख बन गया है।


तुम्हारी तस्वीर को निर्निमेष ताकता रहता हूँ
जिसने तुम्हारी मुस्कराहट को जड़ दिया फ्रेम में
तुम्हारी वो मुस्कराहट जो जग को जीत लेती थी
अब हमेशा के लिए कैद हो कर रह गयी फ्रेम में।

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