Friday, June 19, 2015

तुम अगर आओ तो


तुम अगर आओ तो
आज भीगने चले
झरनों की बौछारों में

तुम अगर आओ तो
आज संग-संग दौड़े
हँसती हरियाली में

तुम अगर आओ तो
आज बागों में झूमे
भौंरों के गुंजारों में

तुम अगर आओ तो
आज प्यार बरसाए
चमकती चांदनी में

तुम अगर आओ तो
आज प्रेम गीत गाऐं
फागुनी हवाओं में

तुम अगर आओ तो
आज छमछम नाचे
बारिश की सरगम में।





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