Friday, January 13, 2012

धौली धौली मूच्छया

माँ गुमारियै में भरयोड़ो पालो
रख देती गाय के आगे
भर खारियो,

दे'र नाणो
बैठ ज्याती दुहण ने
ले'र गोवणियो,

भर देती
दुयोङा दूध री गिलास
पी ज्यातो ऊभो ही गटागट,

दे मुठ्या मे थूक 'र
भाग ज्यातो साइना सागे
खेलण न फटाफट,

झागला स्यूं
बण ज्याती होटा पर
धौली धौली  मूच्छया,

खेळतो कबड्डी
जणा ठोकतो ताळ ओ मरोड़तो
धौली धौली मूच्छया।

(यह कविता  "कुमकुम के छींटे" नामक पुस्तक में प्रकाशित है )








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