Wednesday, January 7, 2015

तुम बसी हो मेरी यादों में

तुम्हारे लौट आने की
पगध्वनि सुनने मेरे कान
बिना सोये जागते रहते हैं

विरह के दिन
रात-रात भर जाग कर


दिल का दर्द बाँटते रहते हैं  

चाँद सितारों की दुनियाँ से
तुम्हारे लौटने के
इन्तजार में
दिल तड़फता है

थक गयी मेरी आँखें
तुम्हारे दीदार के लिए
दिल तरसता है 

यादें नहीं छोडती साथ
कराती रहती है अहसास
तन्हाई के दर्द का

दिल के भावों को
लिखता रहता हूँ ताकि
तम्हें अहसास हो मेरे दर्द का

नहीं सोचा था
यादों में ही बस जायेंगे
जीवन के अफसाने

अँखियाँ ढूंढती
ही रह जाएगी जीवन के
प्यार भरे तराने

फासले लम्बे हो गए 


लेकिन तुम आज भी बसी हो
मेरे दिल में

नज़रों से भले ही दूर हो
लेकिन तुम आज भी बसी हो
मेरी यादों में। 


[ यह कविता "कुछ अनकहीं " में छप गई है।]




No comments:

Post a Comment