Monday, January 26, 2015

जीवन की हकीकत

मेरे दोस्त !
जीवन में तुम पा चुके होंगे
मुझ से अधिक विशिष्ट्ता
लेकिन तुम जीवन को
जी नहीं सके

तुम जीवन के असली
मतलब को भी नहीं
समझ सके

जीवन तो मैंने जीया है
अपनी पत्नी के संग बैठ
तारों के नजारों को देखा है

खेल के मैदान में
बच्चों के संग अपने
बचपन को जिया है

जीवन की
मधुर-पूर्ति की खोज में
मैंने सब कुछ पाया है

प्यार-मुहब्बत
हँसी-ख़ुशी
सब को मैंने जिया है

तुम्हारे लिए
ये सब सपना रहा और
मेरे लिए जीवन

तुम तो जीवन में
अपनी ख़ुशी तलाश ने तक का
समय नहीं निकाल सके

पत्नी और बच्चों के संग
दो मीठी बातें करने तक
नहीं सोच सके

मेरे दोस्त!
जब तक तुम इस बात को
समझोगे तब तक
बहुत देर हो चुकी होगी

रेत बँधी
मुट्ठी सी यह जिंदगी
रीत चुकी होगी।








9 comments:

  1. बच्चों के साथ बिताये गये वक्त जीवन के अनमोल हिस्से होते है।भावपूर्ण प्रस्तुति।

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  2. आज 31/जनवरी/2015 को आपकी पोस्ट का लिंक है http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  3. धन्यवाद राजेश कुमार जी।

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  4. आभार यशवंत जी।

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. इन छोटी छोटी बातों में जो जीवन खोज लेता है वही असल में जीता है ...
    बहुत लाजवाब पंक्तियाँ ...

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  7. धन दौलत की दौड़ में आज मानव वास्तविक खुशियों से कितना दूर हो गया है...खुशियाँ तो उसके चारों और बिखरी हैं, छोटी छोटी बातों में ...बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...

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  8. छोटी छोटी बाते ही जीवन में खुशियां ला देती है ,उसे आपने सहेज कर रखा है ,...बहुत सुन्दर !
    नेता और भ्रष्टाचार!

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  9. आप सभी का आभार।

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