Tuesday, September 2, 2014

जीने का सहारा

नेह  भरे थे  नयन तुम्हारे
चितवन से मृग भी थे हारे
गीत लिखे थे तुम पर मैंने
अपने  स्वर में गाये तुमने

जब तक साथ तुम्हारा था 
जीवन बचपन  लगता था 
अब  तो  जीवन  संध्या है
कुछ  ही  दिन  का मेला है

जब जब याद तुम्हारी आती
कंठ  रुँध, आँखे  भर  आती
मरुभूमि  बन  गयी जिंदगी
सपने  सी  खो गयी जिंदगी

बिना  तुम्हारे रह नहीं पाता
अपना दर्द मै कह नहीं पाता
खुशियाँ सारी  बिखर गयी है
तार- तार हर साँस हो गई है।



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