Tuesday, September 23, 2014

जीवन की परिभाषा




आँख का खुलना
और बंद होना
इतने में ही तो सिमट जाता
है जीवन

एक साँस का आना 
और दूसरी का जाना
इतने में ही तो गुजर जाता
है जीवन

बिजली का चमकना
और लुप्त होना
इतने में ही तो बीत जाता
है जीवन

गर्म तवे पर पानी की बून्द का 
गिरना और मिटना
इतने में ही तो मिट जाता
है जीवन

जलते हुए दीपक का
हवा के झोंकें से बुझना
इतने में ही तो लुट जाता
है जीवन।

बंद मुट्ठी से रेत का
फिसलना
इतने में ही तो रीत जाता
है जीवन।







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