Saturday, September 20, 2014

जब तक तुम साथ थी


जब तक तुम साथ थी
मन में खुशियों के
फूल खिला करते थे
अब तो दुःखों के बादल
छाए हुए हैं।

जब तक तुम साथ थी
जीवन सुहाना सफर
हुवा करता था
अब तो दुःखों के पहाड़
टूट पड़े हैं।

जब तक तुम साथ थी
आँखों में सुख की नींद
बसा करती थी
अब तो आँखों से केवल
अश्रु बहते हैं।

जब तक तुम साथ थी
होठों से प्यार भरे गीत
निकलते थे
अब तो दिल से केवल
आहें निकलती हैं।

जब तक तुम साथ थी
दिन सोने के रातें चांदी
की होती थी
अब तो दिन रेगिस्तान और
रातें पहाड़ होती है।
















No comments:

Post a Comment